- 40 से अधिक विश्वविद्यालय और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त
- 74 साल की उम्र में सुखोई विमान में यात्रा करने वाले पहले राष्ट्रपति
- जनता का राष्ट्रपति कहे जाने वाले पहले राष्ट्रपति
- भारत रत्न से सम्मानित किए जाने वाले दूसरे वैज्ञानिक
- देश के पहले कुंवारे राष्ट्रपति
- एक वैज्ञानिक जिसने एक छोटे से स्कूल में लाइट चले जाने के बाद भी 400 बच्चों से बात की थी.
- इंसान जो एक रॉकेट साइंटिस्ट था, मगर उसने कभी रॉकेट साइंटिस्ट बनने के बारे में सोचा ही नहीं था. वह तो एक एयरफोर्स पायलट बनना चाहता था
- राष्ट्रपति भवन में वह अपने जूतों के फीते खुद बाँधते थे. उन्होंने इसके लिए नौकरों की सेवा लेने से इनकार कर दिया था.
- डीआरडीओ में वैज्ञानिक रहते हुए उन्होंने एक इमारत की दीवार पर टूटे हुए कांच लगाने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया था कि यह पक्षियों के लिए नुकसान देय रहता।
- एक इंजीनियर जिसने राष्ट्रपति बन जाने के बाद भी उस मोची को बुलावा भेजा था, जिससे अक्सर वह अपने जूतों की मरम्मत कराया करता था. राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली केरल यात्रा के दौरान उन्होंने एक मोची और एक होटल के मालिक को राष्ट्रपति भवन बुलाया था. अब्दुल कलाम ने एक वैज्ञानिक के रूप में काफी वक्त केरल में बिताया. तभी उनकी दोस्ती उस होटल के मालिक से हो गई थी जिसमें अक्सर वह खाना खाते थे. होटल मालिक के अलावा मोची से उनके बहुत अच्छे संबंध थे, जिस से वह अपने जूतों की मरम्मत कराया करते थे.
- एक राष्ट्रपति जिसके रिश्तेदार उससे मिलने के लिए ट्रेन के स्लीपर क्लास में सफर करके आए थे और उनको दिल्ली घुमाने के लिए भी उसने कभी सरकारी वाहन का इस्तेमाल न किया. एक बार उनके कुछ रिश्तेदार रामेश्वरम से दिल्ली घूमने आए. उनको घुमाने के लिए कलाम ने कभी सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं किया. उनके खाने का इंतजाम भी निजी तनख्वाह से किया. यहां तक कि एक बार उनकी अतिरिक्त चाय का भुगतान भी उन्होंने चेक देकर किया था. यह बात उनकी मृत्यु के बाद उनके निजी सचिव ने खोली थी. उनका कहना था कि उनके निजी खर्च का बोझ जनता पर नहीं पड़ना चाहिए.
- राष्ट्रपति होने के बावजूद थी खुद को शिक्षकों से बड़ा न माना. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सिर्फ कुछ खास लोगों के लिए पांच कुर्सियां रखी गई थी, जिनमें चार कुर्सियां विश्वविद्यालय के कुलपति समेत मुख्य लोगों के लिए थी और एक राष्ट्रपति कलाम के लिए. राष्ट्रपति के लिए रखी गई कुर्सी बाकी 4 कुर्सियों से आकार में बड़ी थी. कलाम ने आकार देखा तो वजह जानना चाही. उन्हें बताया गया कि यह खासतौर से आपके लिए है क्योंकि आप राष्ट्रपति और भारत के प्रथम नागरिक हैं. कलाम ने कुर्सी पर बैठने से मना कर दिया और कुलपति को उस कुर्सी पर बैठने के लिए कहा लेकिन कुलपति ने भी उस कुर्सी पर बैठने से मना कर दिया. फिर कलाम के लिए बाकी कुर्सियों के आकार की कुर्सी मंगाई गई
अब्दुल कलाम के 79 वें जन्मदिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया गया था. इसके अलावा उन्हें लगभग 40 विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि प्रदान की गई है. भारत सरकार द्वारा उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण का सम्मान दिया गया है, जो उनके द्वारा इसरो और डीआरडीओ में कार्यों के दौरान वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए था. 1997 में कलाम को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया जो उनके वैज्ञानिक अनुसंधान और भारत में तकनीकी विकास में अभूतपूर्व योगदान के लिए था. 2005 में स्वीटजरलैंड की सरकार ने कलाम के स्विट्जरलैंड आगमन के उपलक्ष्य में 26 मई को विज्ञान दिवस घोषित किया था. नेशनल स्पेस सोसायटी ने 2013 में अंतरिक्ष विज्ञान संबंधित परियोजनाओं के कुशल संचालन और प्रबंधन के लिए वॉन ब्राउन अवार्ड से पुरस्कृत किया था.
- 2014 डॉक्टर ऑफ साइंस, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय यूके
- 2013 वान ब्राउन, नेशनल स्पेस सोसायटी
- 2012 डॉक्टर ऑफ लॉज़, साइमन फ्रेजर विश्वविद्यालय
- 2011 आईईईई मानद सदस्यता, आईईईई
- 2010 डॉक्टर ऑफ इंजीनियरिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू
- 2009 मानद डॉक्टरेट, ऑकलैंड विश्वविद्यालय
- 2009 वान कारमन विंग्स अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
- 2008 डॉक्टर ऑफ साइंस, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
- 2007 डॉक्टर ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कार्नेगी मिलन विश्वविद्यालय
- 2007 किंग चार्ल्स मेडल II, रॉयल सोसायटी यूके
- 2000 रामानुजन पुरस्कार,अल्वर्स शोध संस्थान चेन्नई
- 1998 वीर सावरकर पुरस्कार, भारत सरकार
- 1997 इंदिरा गांधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
- 1997 भारत रत्न, भारत सरकार
- 1994 विशिष्ट शोधार्थी, इंस्टिट्यूट ऑफ़ डायरेक्टर्स भारत
- 1990 पद्म विभूषण, भारत सरकार
- 1981 पद्म भूषण, भारत सरकार
मई 2012 में कलाम ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए “मैं आंदोलन को क्या दे सकता हूं” नाम से एक आंदोलन शुरू किया था. उन्हें 2003 और 2006 में एमटीवी यूथ आइकन ऑफ द ईयर के लिए भी नामित किया गया था.
2011 में आई फिल्म आई एम कलाम में एक गरीब बच्चे पर उनके चरित्र का प्रभाव दिखाया गया है. किस तरह एक गरीब बच्चा उनसे प्रभावित हो कर उनकी तरह बनने की कोशिश करता है. पहले वह उनकी तरह बाल बनाता है और फिर अपना नाम छोटू से बदलकर कलाम रख लेता है और जीवन में भी उन्हीं की तरह एक महान वैज्ञानिक और एक अच्छा इंसान बनना चाहता है
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| I am Kalam |
कलाम को देशभर में अलग-अलग तरीकों से श्रद्धांजलि दी गई थी. यहां तक कि अफसोस जाहिर करने के लिए गूगल ने भी अपनी बांह पर काला रिबन बांधा था. गूगल ने अपना शोक प्रकट करने के लिए काले रिबन को शोक प्रतीक के रूप में अपने होम पेज पर दिखाया था.
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| Google showing black ribbon on Kalam's death |
ट्रेन में बैठ कर पार्क में टहलते हुए या चाय की चुस्की लेते हुए आत्मविश्वास की हौसले की बातें करना जितना आसान होता है असल जिंदगी में उसको लागू करना उतना ही मुश्किल .लेकिन कुछ लोग मुश्किल रास्ता ही चलते हैं और वह अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम बनते हैं.
(शामिख़ फ़राज़ की किताब APJ Abdul Kalam- A man beyond the orbit के कुछ अंश )



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