Tuesday, April 16, 2019

जानिए फ़रवरी के कम दिनों का रहस्य

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यूनानी सभ्यता में एक शब्द आता है ‘ कैलेंडस’, जिसका अर्थ होता है 'चिल्लाना'. यह बात उस समय की है जब यूनान में राजा का आदेश सुनाने के लिए मुनादी (एक आदमी का ढोल पीटकर लोगों को इकट्ठा करना) का इस्तेमाल किया जाता था. किसी भी तरह की जानकारी जैसे कब कौन सा त्यौहार होगा या किसी भी तरह का खास ऐलान मुनादी के जरिए ही किया जाता था. जो व्यक्ति चिल्लाकर एलान करता था उससे 'कैलेंडर' कहा जाता था. 

लैटिन भाषा में ‘कैलेंडस’ का अर्थ होता है हिसाब किताब करने का दिन. इसी आधार पर तारीख, दिन और महीनों का हिसाब रखने के लिए जो एक सिस्टम बनाया गया उसे कैलेंडर कहा गया. एक वक्त में जब कैलेंडर नहीं होता था, तब लोग अपने तजुर्बे के अनुसार ही काम करते थे. सर्दी, गर्मी, पतझड़, बारिश यह अलग-अलग मौसम ही अलग-अलग काम करने के संकेत होते थे. त्यौहार और धार्मिक सामाजिक उत्सव सब इन्हीं के आधार पर मनाए जाते थे. लेकिन मौसम कभी-कभी जल्दी या देर से भी आते थे जिस वजह से समय का बिल्कुल ठीक ठीक बंटवारा करना बड़ा ही मुश्किल था. 

कई सौ साल पहले बेबीलोन सभ्यता में जो कैलेंडर प्रयोग किया जाता था, उसके हिसाब से मार्च साल का पहला महीना होता था और इसी आधार पर सितंबर सातवा, अक्टूबर आठवां, नवंबर नवा और दिसंबर दसवां महीना होता था.  यह सारा गणित रोमन कैलेंडर के हिसाब से चलता था जो सातवीं सदी में इस्तेमाल किया जाता था और यह चंद्रमा के हिसाब से बनाया गया था. इस कैलेंडर में दिन 304 और 10 महीने मार्च से लेकर दिसंबर ((मर्सिअस, एप्रिलिस, मैयास, जूनियस, क़ुइन्तिलिस, सेक्सटिलिस, सेप्टेम्बर, ओक्टोबर, नोवेम्बर, और डिसेम्बर) होते थे. लेकिन इसमें एक कमी थी दिनों का सही हिसाब किताब न हो पाने के कारण त्योहार आगे या पीछे हो जाया करते थे. इस वजह से इसमें सुधार की बहुत जरूरत मालूम पड़ने लगी. हर साल कुछ न कुछ दिन जोड़े जाते थे जिससे कि मौसम अपने हिसाब से पड़ सकें.
सीजर जब रोम के तानाशाह बने, तब उन्होंने एक कैलेंडर डिजाइन करवाया। इस कैलेंडर को डिजाइन किया सॉसेजनेस जो कि उस वक्त का एक मशहूर एस्ट्रोनॉमर था. कैलेंडर को जूलियन कैलेंडर नाम दिया गया. यह कैलेंडर चंद्रमा के बजाय सूर्य के हिसाब से बनाया गया और इसमें कुल 365 और 1/4 दिन रखे गए. वैसे तो सीजर और सॉसेजनेस ने काफी सावधानी बरती थी इस कैलेंडर को बनाने में. लेकिन दिनों की सही गिनती का इस्तेमाल न किया। दिनों की सही संख्या 365.242199 थे जबकि उन्होंने 365.25 इस्तेमाल किया. इसका एक बड़ा असर यह हुआ कि हर साल 11 मिनट का हेरफेर होने लगा और 1000 साल में 7 दिनों की कमी हुई और 15वीं सदी आते-आते 10 दिनों की गड़बड़ी हो गई. 

इससे पहले सीजर ने 46 BC में  67 दिन और जोड़े थे और नए साल को 1 मार्च की जगह 1 जनवरी से शुरू करने का ऐलान किया था.  इसी के साथ हर 4 साल में फरवरी के 1 महीने में 1 दिन जोड़ने का भी फैसला किया गया. 46 बीसी से पहले 1 साल 10 महीने का होता था जो 1 मार्च से शुरू होता था और 31 दिसंबर को खत्म हो जाता था लेकिन 46 बीसी में 67 दिन जोड़ने के बाद 2 महीने जनवरी और फरवरी और जोड़े गए. इस तरह जितने भी दिन कम थे वह फरवरी में कम रह गए. और  इस वजह से ही फरवरी 28 या 29 दिन का होता है. अपनी हत्या से पहले सीजर में क़ुइन्तिलिस का नाम बदलकर अपने नाम पर जूलियस किया था जो बाद में जुलाई कहा गया इसी तरह उसके एक उत्तराधिकारी ने सेक्सटिलिस को बदल कर ऑगस्टस किया जो बाद में अगस्त कहा गया. 

रोमन चर्च ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए इसमें सुधार करने का जिम्मा लिया और 1570 ईस्वी के आसपास पोप ग्रेगरी ने क्रिस्टोफर को एक नया कैलेंडर बनाने का जिम्मा सौंप दिया. क्रिस्टोफर ने 1582 में कैलेंडर को बनाकर तैयार किया और ग्रेगरी के नाम पर इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर कहा गया तब से लेकर आज तक पूरी दुनिया में इसी कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है .


वैसे तो पूरी दुनिया में ग्रेगोरियन कैलेंडर का ही इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस कैलेंडर में भी कुछ कमियां हैं. जूलियन कैलेंडर में हर साल 11 मिनट की गड़बड़ी होती थी जिसकी वजह से दिनों का एक बड़ा हेरफेर देखने को मिला लेकिन ग्रेगोरियन कैलेंडर में भी हर साल 26 सेकंड का फर्क आता है. और इसका असर यह होता है कि हर 435 साल में 3 घंटे की गड़बड़ी दिखाई देती है. आंकड़ों के अनुसार सन 4909 में इस कैलेंडर में पूरे 1 दिन का फर्क दिखाई देगा .अभी तक इस दिक्कत को दूर करने के लिए किसी के पास कोई सुझाव नहीं है लेकिन ग्रेगोरियन कैलेंडर पुराने सभी कैलेंडर की तुलना में कहीं ज्यादा शुद्ध है. 

बीड और वैज्ञानिक बेकन का योगदान

धर्माचार्य सेंट बीट को भी ग्रेगोरियन कैलेंडर के एक बड़े योगदानकर्ता के रूप में जाना जाता है. सबसे पहले उन्होंने ही बताया कि 1 साल में 365 दिन और 6 घंटे नहीं बल्कि 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट और कुछ सेकंड होते हैं. बीट के 500 साल बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदान वैज्ञानिक बेकन का माना जाता है. वैज्ञानिक बेकन ने 1 साल की समय अवधि को सबसे ज्यादा शुद्ध करके बताया . 1582 में जब ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू हुआ तो समय चक्र को ठीक करने के लिए ग्रेगोरियन कैलेंडर से 10 दिन निकाल दिए गए और उस साल को 10 दिन छोटा कर दिया गया. 5 अक्टूबर के बाद अगली तारीख 15 अक्टूबर रखी गई
यह भी एक बहुत मजेदार बात है कि सब देशों ने ग्रेगोरियन कैलेंडर को फौरन ही अपने यहां लागू नहीं किया .ब्रिटिश साम्राज्य ने भी 1752 में ग्रेगोरियन कैलेंडर अपने यहां लागू किया. जब ब्रिटिश साम्राज्य में यह लागू हुआ उस वक्त समय चक्र को ठीक करने के लिए सितंबर महीने की दूसरी तारीख से लेकर 13 तक की तारीख निकाल दी गई जिससे कि नया कैलेंडर पुराने कैलेंडर के समय अवधि से सामंजस्य बिठा सके




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